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अधिवक्ता अभिषेक दूबे के तर्क से आरोपियों को मिलीं जमानत



 27/Jul/20

जिला जज एवं सत्र न्यायालय जौनपुर मदन पाल सिंह की अदालत ने लूट व छिनैती के मामले में ग्राम गद्दोपुर थाना जंसा जिला वाराणसी निवासी विनय उर्फ करिया ऊर्फ जयहिंद व दस हजार का इनामी सोनू यादव उर्फ सुनील यादव की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने पचास - पचास हजार की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता अभिषेक कुमार दूबे ने तर्क दिया।

जानें क्या है मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा विनोद कुमार मौर्या ने थाना केराकत जिला जौनपुर में प्राथमिक दर्ज कराई थी कि 4 जून 2020 को सुबह 8:36 पर घर के करीब उसके ग्राहक सेवा केंद्र मखदूमपुर में वह और उसके सहयोगी राजकुमार मौर्या मौजूद थे, कि उसी समय दो अज्ञात व्यक्ति ग्राहक सेवा केंद्र पर आकर असलहा सटा कर उसका रूपया छिन कर भागने लगे जब उसने ऊपर से शोर मचाया तो नीचें के दुकानदार बदमाशों को दौड़ाये तो उसका गमछा में कुछ रूपयें फेक दियें तथा उसमें से कुछ रूपया लेकर पराउगंज की तरफ मोटर साइकिल से भाग गयें। बदमाश भागते समय हवाई फायरिंग करतें हुये भाग गयें। भागते हुए और लोगों ने भी देखा है और पहचाना है।

जानें क्या दिया अभियुक्तों के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक कुमार दूबे ने तर्क

अभियुक्त विनय उर्फ करिया उर्फ जयहिंद व दस हजार का इनामिया सोनू यादव उर्फ सुनील यादव के विद्वान अधिवक्ता अभिषेक कुमार दूबे ने कोर्ट में तर्क दिया कि प्रार्थी निर्दोष है। उसे गलत ढंग से अभियुक्त बनाया गया है। प्रार्थी गण द्वारा कोई अपराध नहीं किया है। आवेदकगण प्रथम सूचना रिपोर्ट नामित नहीं है। कथित घटना का कोई चक्षुदर्शी साक्षी नहीं है। आवेदकगण सम्मानित परिवार के सदस्य हैं। अभियुक्तगण के पास से कोई बरामदगी नहीं है। प्रार्थी का कोई अपराधिक इतिहास नहीं है। प्रार्थी को परेशान करने के लिए अभियुक्त बनाया गया है।

प्रार्थी को पुलिस घर से पकड़ कर थाने ले गई और फर्जी चालान कर दिया। कहां अभियुक्त विनय उर्फ करिया ऊर्फ जयहिंद और सोनू यादव सुनील यादव 13 जून 2020 से जेल में है। उपरोक्त आधारों पर आवेदक को जमानत प्रदान किए जाने का निवेदन विद्वान अधिवक्ता अभिषेक कुमार दूबे द्वारा किया गया है।

कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का दिया आदेश

कोर्ट ने अभियुक्तों के विद्वान अधिवक्ता अभिषेक कुमार दूबे एवं राज्य की ओर से विद्वान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी के तर्कों को सुना एवं अभियोजन प्रपत्रों का अवलोकन करने के बाद अभियुक्तों को मुबलिग 50- 50 हजार की दो जमानतें तथा इतने ही धनराशि का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने पर संबंधित मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर जमानत पर रिहा किया जाए।

 


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