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चंदौली से वाराणसी रेफर के दौरान हुआ मरीज का मौत

फहरान अहमद

 19/Aug/20

नहीं बन रहा मृत्यु प्रमाण पत्र

मनुष्यों ने धरती के भगवान का दर्जा चिकित्सकों को दिया है, लेकिन अगर वहीं चिकित्सक व्यवस्था से खिलवाड़ करने लगेंगे तो क्या कहेंगे। चिकित्सकों का नाता मरीज के अस्पताल में भर्ती रहने तक का ही होता है। अगर मरीज को रेफर कर दिया गया है तो इसके बाद चिकित्सक की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। इसीलिए तो पं कमलापति त्रिपाठी संयुक्त चिकित्सालय चंदौली से रेफर कोरोना संक्रमित मरीज की बीएचयू ले जाते समय रास्ते में मौत हो जाने के बाद चिकित्सकों ने पल्ला झाड़ लिया।

कैलाशपुरी स्थित स्वागत मेगामाट, अजय सजदेवा के स्टाफ रहें संजय वर्मा की कोरोना से मौत होने के बाद चिकित्सा जगत की खूब किरकिरी हो रही है। और हो भी क्यों न, जिस चिकित्सक ने मरीज को रेफर कर दिया, उसने ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने से हाथ खड़ा कर दिया। स्वागत मेगामार्ट कैलाशपुरी के मालिक अजय सजदेवा ने क्लाउन टाइम्स से बात करतें हुए बताया कि कैलाशपुरी निवासी व मेरे 20 वर्षीय सहयोगी संजय वर्मा उम्र (47) की तबीयत 11 जुलाई से खराब चल रही थी। चिकित्सकों के परामर्श पर दवा ली। लेकिन, 17 जुलाई तक उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। उनके बेटे सुमित वर्मा ने बताया कि 18 जुलाई को पिता ने कोविड-19 की जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद वे होम क्वारंटाइन हो गए। 19 जुलाई को उन्होंने फिर जांच कराई। 20 जुलाई को सांस फूलने लगी। परिजनों ने उन्हें जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया। वहां डिप्टी सीएमओ डॉ आर बी शरण ने उनकी जांच की। 23 जुलाई को उनके स्वास्थ्य में सुधार न होने की जानकारी परिजनों को दी गई। अगले दिन 24 जुलाई को संजय वर्मा को बीएचयू के लिए रेफर कर दिया गया। बीएचयू ले जाते समय उनकी मौत हो गई। बीएचयू ने किसी तरह की स्लीप देने से मना कर दिया। उधर जिला चिकित्सालय आने पर परिजनों को बीएचयू जाने की सलाह दी गई। परिजनों ने बताया कि बीएचयू के चिकित्सकों ने भर्ती से पहले मृत्यु होने के कारण बताते हुए कोई स्लीप नहीं दिया।

उधर जब क्लाउन टाइम्स ने सीएमओ चंदौली से बात की तो उन्होने बताया कि संजय वर्मा जिला चिकित्सालय आये थें, उनको हमलोगों ने आईसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया, हालत ज्यादा खाराब होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, पर स्वास्थ में कोई सुधार न होने पर उन्हें बीएचयू रेफर कर दिया। फिर क्या हुआ हमें कोई जानकारी नहीं। एक पत्र में पढ़ने पर पता चला उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए पूछने पर बताया कि पोर्ट पर देखते हैं कि मरीज किस दिनांक को वार्ड में भर्ती थें। फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 


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