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क्षत्रिय दिग्गज नेता विनीत सिंह के भांजे प्रभाकर सिंह ने लगातार तीसरी बार पीसीएस की परीक्षा में लहराया परचम

फरहान अहमद

 14/Sep/20

UPPCS 2018 में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर हुए चयनित

उत्तर प्रदेश पीसीएस के शुक्रवार को आए परिणाम में जिले के कई होनहारों ने परचम लहराया है। होनहारों की इस सफलता से परिजनों सहित उनके गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाइयां देने के लिए उनके घरों पर लोगों का तांता लगा रहा। वहीं मिर्जापुर/ सोनभद्र के पूर्व एमएलसी व दिग्गज क्षत्रिय नेता श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह के भांजे प्रभाकर सिंह ने भी राज्य लोकसेवा आयोग, 2018 की परीक्षा में अपना परचम लहराया है।

 

जौनपुर जिले के जलालपुर विकासखंड के कुसांव गाॅव निवासी संतोष सिंह के पुत्र प्रभाकर सिंह का चयन PCS 2016 में नायब तहसीलदार के पद पर हुआ था और अगले ही वर्ष Uppsc 2017 के अंतिम परिणाम में उन्हें यात्री एवम मालकर अधिकारी का पद मिला। प्रभाकर अपने तीसरे प्रयास में PCS 2018 के अंतिम परिणाम में सहायक श्रमायुक्त के पद पर चयनित हुए। क्लाउन टाइम्स से बातचीत में प्रभाकर सिंह ने बताया कि इससे पहले 2015 में CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट पद पर चयनित हुए थे और सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। प्रभाकर को लगातार मिली चौथी सफ़लता आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

बीएचयू से परास्नातक एवं पुरातत्व से नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण प्रभाकर ने बताया कि उनकी पढ़ाई आगे भी जारी रहेगी और वे इससे भी बेहतर पद प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। फिलहाल वे आईएएस की परीक्षा के लिए पढ़ाई कर रहे हैं।

 

अपने मामाजी के बारे में पूछे जाने पर प्रभाकर बताते हैं कि मेरे मामा श्याम नारायण सिंह (विनीत सिंह) हम लोगों को हमेशा सिविल सेवा में जाने के लिए प्रोत्साहित करतें रहे हैं। शिक्षित व्यक्तियों के प्रति उनके मन में अत्यंत सम्मान का भाव रहता हैं। बचपन से ही घर के सभी बच्चों को शिक्षा एवं उसकी उसकी महत्ता के संदर्भ में जागरूक करतें रहे हैं। मामाजी हम लोगों से कहतें थे कि अगर मुझे अपनी युवावस्था में पढ़ने की उपयुक्त परिस्थितियां मिली होती तो मैं आईएएस ऑफिसर बनता। इन्हीं सब प्रोत्साहन की वजह से नेट-जेआरएफ होने के बावज़ूद पीएचडी करने की इच्छा नही हुई और सिविल सर्विसेज में कैरियर बनाने के लिए प्रेरणा मिली।उन्होंने कहा कि मामाजी वास्तव में शिक्षा को लेकर बेहद जागरूक है। वो कहते हैं कोशिश करो, कोई जरूरी नही आईएएस ही बनो। किसी भी पद पर जाओ, पर अपनी एक पहचान बनाओ। पहचान छोटी ही सही लेकिन खुद की होनी चाहिए। इनके चयन के बाद पूरे परिवार में जश्न का माहौल हैं और उनके मित्र व चाहने वाले लगातार बधाई दे रहे हैं।


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