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धनतेरस पर मां अन्नपूर्णा मंदिर में स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन व खजाने से भक्त हुए मालामाल



 12/Nov/20

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुंद्र मंथन के द्वारा देवी लक्ष्मी का अवतरण हुआ था साथ ही भगवान धनवंतरि जो देवताओं के चिकित्सक है अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसीलिए आज की तिथि को धनतेरस या धन त्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। आज ही के दिन से पंच दिवसीय दिवाली महोत्सव का आरंभ होता है, ऐसे बाबा भोले की नगरी काशी में अति प्राचीन अन्नपूर्णा मंदिर में स्थित स्वर्णिम प्रतिमा का दर्शन करने धार्मिक महत्व है है।
ऐसी मान्यता है बाबा भोलेनाथ को भिक्षा देने वाली माता अन्नपूर्णा ने काशी को यह वरदान दिया था कि यहां पर कोई भी भूखा नहीं सोएगा।
आज के दिन मां अन्नपूर्णा के खजाने को लाखों की संख्या में आये दर्शनार्थियों में वितरित किया जाता है।

धनतेरस के दिन मिलने वाले खजाने को पाने के लिये भक्तों की लंबी कतार लगती है, जिससे जीवन में सुख समृद्धि रहती है और उनके जीवन में कभी धन- धान्य की कमी नहीं होती।


कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुंद्र मंथन के द्वारा देवी लक्ष्मी का अवतरण हुआ था साथ ही भगवान धनवंतरि जो देवताओं के चिकित्सक है अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसीलिए तिथि को धनतेरस या धन त्रयोदशी नाम से जाना जाता है। आज के दिन से पंच दिवसीय दिवाली महोत्सव का आरंभ होता है ऐसे में अति प्राचीन अन्नपूर्णा मंदिर में स्थित स्वर्णिम प्रतिमा का दर्शन करने की परम्परा है। भोलेनाथ को भिक्षा देने वाली माता अन्नपूर्णा ने काशी को यह वरदान दिया था कि यहां पर कोई भी भूखा नहीं सोएगा आज के दिन है माता का खज़ाना दर्शनार्थियों में बाटा जाता है जिससे बारे में प्रसिद्ध है कि इस खजाने को पाने वाला सुख समृद्धि को प्राप्त करता है तथा उनके जीवन में कभी धन धान्य की कमी नहीं होती।

 


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