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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में अब लागू होगा पुलिस कमिश्न्रेट सिस्टम



 26/Mar/21

प्रदेश सरकार ने वाराणसी में कानून व्‍यवस्‍था बेहतर बनाने के लिये उठाये कदम

वाराणसी कमिश्नरेट के पहले पुलिस कमिश्नर के पद एडीजी ए. सतीश गणेश हुए तैनात

प्रदेश सरकार ने वाराणसी में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को मंजूरी दे दी है। कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए यह प्रदेश सरकार का एक प्रभावी कदम माना जा रहा है। देश में फिलहाल पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम का प्रावधान 10 लाख या इससे ज्यादा की आबादी वाले शहर के लिए किया गया है। इसके लिए गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति ने वर्ष 2005 में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी थी। इससे पहले वर्ष 1983 में प्रकाशित नेशनल पुलिस कमीशन की छठी रिपोर्ट के अनुसार कमिश्नरेट सिस्टम पांच लाख या इससे ज्यादा आबादी वाले शहर में लागू करने का निर्णय लिया गया था। गौरतलब है कि पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को ब्रिटिश हुकूमत ने पुलिस एक्ट, 1861 के अस्तित्व में आने से पहले ही तत्कालीन बंबई, कलकत्ता और चेन्नई शहर में लागू कर दिया था। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम वर्ष 1977-79 में लागू हुआ था।

वाराणसी कमिश्नरेट के पहले पुलिस कमिश्नर के पद पर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार की सुबह अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) ए. सतीश गणेश को तैनात किया गया है। 1996 बैच के आईपीएस ए. सतीश गणेश अब तक आगरा में एडीजी/आईजी रेंज के पद पर तैनात थे। वहीं, अब तक डीआईजी/एसएसपी वाराणसी के पद पर तैनात रहे आईपीएस अमित पाठक का तबादला गाजियाबाद किया गया है। कंप्यूटर साइंस से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले ए. सतीश गणेश मूल रूप से बिलासपुर के रहने वाले हैं। इससे पहले वर्ष 2012 में ए. सतीश गणेश वाराणसी में डीआईजी रेंज के पद पर तैनात रह चुके हैं। ए. सतीश गणेश की गिनती उत्तर प्रदेश के तेजतर्रार, ईमानदार और समय के पाबंद पुलिस अफसरों में की जाती है। वहीं, अब तक डीआईजी/एसएसपी वाराणसी के पद पर तैनात रहे आईपीएस अमित पाठक का तबादला इसी पद पर गाजियाबाद किया गया है। अब तक एडीजी/आईजी रेंज वाराणसी के पद पर तैनात रहे आईपीएस विजय सिंह मीना का तबादला एडीजी सतर्कता अधिष्ठान लखनऊ के पद पर किया गया है। इसके अलावा आईपीएस अखिलेश कुमार मीणा और अनिल सिंह को वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) के पद पर तैनात किया गया है। आईपीएस एसके भगत को वाराणसी में आईजी रेंज के पद पर तैनात किया गया है। एसके भगत इससे पहले भी वाराणसी में डीआईजी रेंज और आईजी जोन के पद पर काम कर चुके हैं। बता दें कि लखनऊ और नोएडा के बाद बृहस्पतिवार की रात प्रदेश सरकार ने वाराणसी और कानपुर में भी पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को मंजूरी दी थी। इसी के तहत अब वाराणसी में आईपीएस ए. सतीश गणेश को पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात किया गया है। आईपीएस अमित पाठक ने पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम का स्वागत करते हुए कहा कि पुलिसिंग को और बेहतर बनाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम की मंजूरी एक अच्छी व्यवस्था है। वाराणसी लगभग 40 लाख से ज्यादा की आबादी वाला प्रदेश और देश का एक महत्वपूर्ण जनपद है। पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम का सकारात्मक असर आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था के साथ ही यातायात व्यवस्था में भी देखने को मिलेगा।

कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 और 107/16 के तहत पाबंद किए जाने के लिए एक पुलिस कोर्ट बनेगी। इसमें पुलिस के कानून-व्यवस्था संबंधित मिले अधिकारों को अनुपालन कराने के लिए निर्णय होगा। बाकी अन्य आपराधिक मामलों के लिए अदालत में ही सुनवाई होगी। लखनऊ में कमिश्नरेट सिस्टम लागू हुआ तो वहां कमिश्नर के साथ ही 11 आईपीएस तैनात किए गए थे। इसके आधार पर यह माना जा रहा है कि बनारस में थानों की संख्या कम होने के कारण लखनऊ से कम संख्या में आईपीएस तैनात किए जाएंगे। इन सभी के लिए कार्यालय, वाहन, आवास सहित अन्य संसाधनों की जल्द ही व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसके अलावा थानेदारों, क्षेत्राधिकारियों और एडिशनल एसपी को भी कमिश्नरेट सिस्टम की आधारभूत जानकारी देकर उन्हें उनकी शक्तियों, अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में प्रशिक्षित करना होगा।

खत्म हुआ पुलिस कप्तान का पद, सिर्फ ग्रामीण इलाके में एसपी

कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के साथ ही जिले में पुलिस कप्तान का पद खत्म हो जाएगा। वाराणसी कमिश्नरेट में कोतवाली, आदमपुर, रामनगर, भेलूपुर, लंका, मंडुवाडीह, चेतगंज, जैतपुरा, सिगरा, कैंट, शिवपुर, सारनाथ, लालपुर-पांडेयपुर, दशाश्वमेध, चौक, लक्सा, पर्यटक और महिला थाना रहेंगे। इन 18 थानों के मुखिया पुलिस कमिश्नर होंगे। वहीं जिले के ग्रामीण इलाके के रोहनिया, जंसा, लोहता, बड़ागांव, मिर्जामुराद, कपसेठी, चौबेपुर, चोलापुर, फूलपुर और सिंधौरा थाने के मुखिया के तौर पर पुलिस अधीक्षक स्तर के अधीक्षक तैनात किए जाएंगे। इस तरह से जिले के ग्रामीण क्षेत्र में कानून व्यवस्था में जिलाधिकारी का दखल पूर्व की भांति यथावत रहेगा।

क्‍या है यह कमिश्‍नर प्रणाली सिस्‍टम

यदि हम कमिश्नर प्रणाली को सामान्य भाषा में समझें तो पुलिस अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, वे आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम या मंडल कमिश्नर या फिर शासन के आदेश अनुसार ही कार्य करते हैं। लेकिन पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर जिला अधिकारी और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के ये अधिकार पुलिस अधिकारियों को मिल जाते हैं।

कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर पुलिस के अधिकार काफी हद तक बढ़ जाएंगे। कानून व्यस्था से जुड़े तमाम मुद्दों पर पुलिस कमिश्नर निर्णय ले सकेंगे। जिले में डीएम के पास अटकी रहने वाली तमाम फाइलों को अनुमति लेने का तमाम तरह का झंझट भी खत्म हो जाएगा। कमिश्नर सिस्टम लागू होते ही एसडीएम और एडीएम को दी गई एग्जीक्यूटिव मैजिस्टेरियल पावर पुलिस को मिल जाएगी। इससे पुलिस शांति भंग की आशंका में निरुद्ध करने से लेकर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और रासुका तक लगा सकेगी। इन चीजों को करने के लिए डीएम से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, फिलहाल ये सब लगाने के लिए डीएम की सहमति जरूरी होती है।

 

कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर ये होंगे पुलिस के पद

पुलिस आयुक्त या कमिश्नर – सीपी

संयुक्त आयुक्त या ज्वॉइंट कमिश्नर जेसीपी

डिप्टी कमिश्नर डीसीपी

सहायक आयुक्त- एसीपी

पुलिस इंस्पेक्टर पीआई

सब-इंस्पेक्टर एसआई


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