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लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकता : सुप्रीम कोर्ट



 30/Sep/21

पटाखों में चेहरे जहरीले रसायनों के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की प्रारंभिक रिपोर्ट में छह प्रमुख पटाखा इकाइयों को आदेश का उल्लंघन करने का दोषी ठहराए जाने के बाद सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट ने आतिशबाजी निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है कि उनके विरुद्ध अवमानना क्यों की गई? कोर्ट ने टिप्पणी की है कि क्या उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं की जानी चाहिए और उनके लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किए जाने चाहिए ?
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना ने कहा कि पटाखों के निर्माण में जहरीले रसायनों के इस्तेमाल पर सीबीआई की रिपोर्ट बहुत गंभीर है और बेरियम के इस्तेमाल और पटाखों की लेबलिंग पर अदालत के आदेशों का 'प्रथम दृष्टया' उल्लंघन भी है। कोर्ट ने कहा कि लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है।
कहा कि "केवल अस्थमा से पीड़ित लोग ही इसे महसूस कर सकते हैं। हमें देश को देखते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण रखना होगा, क्योंकि हर दिन एक उत्सव होता है। लेकिन हमें अन्य कारकों को भी देखना होगा और हम लोगों को पीड़ित होने और मरने की अनुमति नहीं दे सकते।"
पीठ ने कहा, अगर केवल हरे पटाखों के लिए आदेश जारी होता है, तब भी इसका उल्लंघन हो सकता है, और निर्माता प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग करना जारी रख सकते हैं। शीर्ष अदालत ने पटाखा निर्माताओं को सीबीआई की रिपोर्ट का अध्ययन करने और उस पर एक काउंटर दाखिल करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 6 अक्टूबर तय की है। जब एक पटाखा निर्माता का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने अदालत से उसके मुवक्किल की बात सुनने के लिए कहा, तो पीठ ने टिप्पणी की, "हां, हम आपको जेल भेजने से पहले सुनेंगे।" अदालत में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं।
मानक आतिशबाजी पर सीबीआई, चेन्नई के संयुक्त निदेशक की रिपोर्ट में कहा गया है, "रासायनिक विश्लेषण से पता चला है कि 11 तैयार पटाखों और कच्चे माल के एक नमूने में बेरियम नमक था, जिसमें से चार तैयार पटाखों का बेरियम के लिए सकारात्मक परीक्षण वर्ष 2020 में निर्मित किया गया था। अर्थात माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 23 अक्टूबर 2018 के आदेश द्वारा बेरियम नमक पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी तैयार पटाखों के शेष सात नमूने ढीले रूप में एकत्र किए गए थे, इसलिए निर्माण की तारीख और रासायनिक संरचना का विवरण ज्ञात नहीं था।"
कुल मिलाकर दीपावली से पहले पटाखा निर्माताओं के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से अब उनके सामने भारी संकट आ गया, लिहाजा आम जनता की जिंदगी के लिए खतरनाक पटाखों के निर्माण में जहरीले रसायनों का प्रयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित करना लाजमी है।


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