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PM मोदी के चुनावी रणक्षेत्र बनारस से कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी करेंगी UP के 2022 का चुनावी शंखनाद



 09/Oct/21

पूर्वांचल में ब्राह्मणों मतदाताओं को साधने में अहम भूमिका निभाने वाले औरंगाबाद हाउस के कद्दावर कांग्रेसी नेता राजेशपति त्रिपाठी को जनसभा में क्यों नहीं बुलाया ?

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उत्तर प्रदेश में 2022 के आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रविवार 10 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी रण-क्षेत्र बनारस के रोहनिया से कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा करेंगी चुनावी शंखनाद। 

आजादी के बाद पहली बार पूर्वांचल के ब्राह्मण मतदाताओं को कांग्रेस से जोड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले औरंगाबाद हाउस के कद्दावर नेता राजेशपति त्रिपाठी को कांग्रेस की जनसभा से आखिर क्यों रखा गया दूर। 

आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस के इतने बड़े आयोजन में कांग्रेस की लिए पूरी जिंदगी खफाने वाले स्वर्गीय पंडित कमला पति त्रिपाठी के औरंगाबाद हाउस के कद्दावर नेता राजेशपति त्रिपाठी को कांग्रेस संगठन में कोई तबज्जो नहीं दिया। जिसको लेकर औरंगाबाद हाउस से जुड़े दिग्गज कांग्रेसियों के बीच जबरदस्त चर्चा है, लेकिन कोई खुलकर कुछ नहीं बोल रहा है। ऐसे में पूर्वांचल के ब्राम्हण मतदाताओं के बीच अपनी अलग पहचान रखने वाले औरंगाबाद हाउस के नेता राजेश पति त्रिपाठी ने क्लाउन टाइम्स से फोन पर हुई बात-चीत कहा कि मैं कांग्रेस का एक समर्पित कार्यकर्ता हूं, बावजूद इसके इस बार हमें किसी ने बुलाया। 

इस पूरे मामले में क्लाउन टाइम्स ने *कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय* से उनकी प्रक्रिया जाने के लिए फोन किया तो वे दो टूक शब्दों में बोले कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं बोलना। 
बताते चलें कि राजेशपति त्रिपाठी ने ही पूर्व विधायक अजय राय को पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के जबरदस्त विरोध के बावजूद न केवल कांग्रेस में शामिल कराया, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व राहुल, सोनिया, प्रियंका से लगायत सभी नेताओं के बीच जननेता अजय राय की लोकप्रियता को इस प्रकार स्थापित किया कि आज बनारस कांग्रेस की पहचान अजय राय के बिना अधूरी है, आज पूर्व विधायक ही औरंगाबाद हाउस के लिए बेगाने हो गए हैं। 

वही दूसरी ओर *कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे* ने भी क्लाउन टाइम्स को बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि राजेशपति त्रिपाठी को क्यों नहीं बुलाया गया बल्कि उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से इस बारे में सवाल पूछने को बोला। 

मजे की बात है कि *औरंगाबाद हाउस के कृपापात्र डॉ. सतीश राय* सब कुछ जानते हुए क्लाउन टाइम्स के सवाल पर कहा कि उन्हें कुछ भी पता नहीं। 

यहां इस बात का जिक्र करना लाजमी है, कि आजादी की लड़ाई में भारत से अंग्रेजो को भगाने और कांग्रेस के संस्थापकों में से एक उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पं. कमलापति त्रिपाठी के पोते औरंगाबाद हाउस के झंडावरदार नेता राजेश पति त्रिपाठी को केवल इसलिए वाराणसी के रोहनिया में आयोजित श्रीमती प्रियंका गांधी की जनसभा में केवल उन्हें इसलिए दूर रखा गया कि वे कांग्रेस से स्तीफा देनें वाले पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी के पिता हैं। 

कुल मिलाकर इसी बनारस से प्रधानमंत्री मोदी ने
पिछले दोनों लोकसभा और एक विधानसभा के चुनाव में बनारस से ही पूर्वांचल में फतह करने के लिए ऐसा चुनावी शंखनाद किया कि पूरा विपक्ष का गुरुर चकनाचूर हो गया। क्योंकि भाजपा संगठन के कार्यकर्ता चुनाव के वक्त सारे मतभेद को भुलाकर केवल पार्टी के द्वारा अधिक प्रत्याशियों को जिताने में कोई कोर - कसर नहीं छोड़ते। 

वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी नेता आपसी गुटबंदी के चलते अपने ही पार्टी के दिग्गज नेताओं के विरुद्ध जब मौका मिलता है उन्हें पटखनी देने में पीछे नहीं रहते। जैसा कि वर्तमान में औरंगाबाद हाउस के दिग्गज नेता राजेशपति त्रिपाठी की उपेक्षा के बाद देखने को मिल रहा है। 

कुल मिलाकर पूरे उत्तर प्रदेश में अपना वजूद खो चुकी कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी की चुनावी जबसभा में पूर्वांचल के 8 जिलो से एक लाख कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बहाने पूर्वांचल को साधने का दावा किया जा रहा है। 

यह तो उत्तर प्रदेश के 2022 के विधानसभा चुनाव में योगी और मोदी की चुनावी आंधी में कांग्रेस की प्रियंका गांधी अपनी टीम के साथ ठहर पाती है या नहीं। 


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