MENU

ख्रीस्त जयंती पर सामाजिक धार्मिक एकता प्रेम बंधुत्व समरसता एवं शांति की स्थापना : डॉ. यूजीन जोसेफ

पूजा कपूर

 23/Dec/17

ख्रीस्त जयंती के पुनीत अवसर पर वाराणसी धर्म प्रांत के धर्माचार्य यूजीन जोसेफ ने प्रेस वार्ता के दौरान अपने संदेश में कहा कि काशी नगरी के साथ-साथ समस्त देशवासियों को ख्रीस्त जयंती एवं नव वर्ष की शुभकामनाएं देता हूं तथा जन्मे प्रभु ईशु से विश्व शांति समरसता सुख एवं समृद्धि हेतु प्रार्थना करता हूंl

कहां की जनसामान्य के प्रति ख्रीस्त जयंती एवं नव वर्ष की शुभकामनाएं व्यक्त करना तथा सब जन की उज्जवल भविष्य की कामना करना l

संपूर्ण ख्रीस्त जयंती अर्थात क्रिसमस के अवसर पर आयोजित समारोह श्रृंखला का एकमात्र उद्देश्य ख्रीस्त जयंती की खुशी को सबके साथ साझा करना है जिससे सामाजिक तथा धार्मिक एकता , प्रेम , बंधुत्व, समरसता एवं शांति की स्थापना हो, जिसके लिये प्रत्येक व्यक्ति भेदभाव को तज एक मंच पर आए जिससे उस स्वर्गराज्य की स्थापना हो जिसके लिए प्रभु अवतरित हुए तथा उस राज्य को प्रत्येक व्यक्ति अपने पड़ोसियों के साथ - साथ स्वयं में अनुभव कर सके l

पारंपरिक रुप से सब ख्रीस्तीय आगमन काल के जप, तप ,त्याग एवं साधना द्वारा स्वयं को ख्रीस्त जयंती के लिए तैयार कर चुके हैं l ख्रीस्त जयंती गीतों एवं विभिन्न कार्यक्रमों द्वारा ख्रीस्त जयंती का माहौल तैयार हो चुका है और सब जन प्रभु दर्शन को आतुर हैंl

प्रायः ख्रीस्त जयंती समारोह का शुभारंभ 24 दिसंबर को मध्य रात्रि में पूजन विधि द्वारा होता है परंतु इस वर्ष 24 दिसंबर को ख्रीस्त जयंती की पूर्व संध्या पर बहुधर्मी ख्रीस्त जयंती मिलन द्वारा होगा l इस मिलन समारोह में विभिन्न धर्म के धर्मगुरुओं एवं प्रतिनिधियों के साथ-साथ काशी नगरी के विशिष्टजन शामिल होकर एकता प्रेम एवं बंधुत्व के साथ-साथ विश्व शांति का संदेश देंगे l बहुधर्मी सह अस्तित्व काशी की अनोखी पहचान है और यह स्वयं में तहजीबों का आदर्श है जिसे हम प्रभु ईसा के जन्म उत्सव की पूर्व संध्या पर देखेंगे l

विधिवत 24 दिसंबर को मध्य रात्रि में ख्रीस्त जयंती समारोह का शुभारंभ पूजनविधि द्वारा होगा जब संपूर्ण ख्रीस्तीय समुदाय गिरजाघर में प्रभु की स्तुति एवं आराधना हेतु एकत्रित होंगे l यह हमारा विश्वास है कि संसार के मुक्तिदाता प्रभु ईसा ईश्वर होते हुए भी 24 दिसंबर की मध्यरात्रि में इस संसार में अवतरित हुए अर्थात मानव रूप धारण किये l इसलिए , मध्य रात्रि में ही उनके आगमन के समय पवित्र पूजन विधि (मिस्सा बलिदान) संपन्न होता है और विशेष महिमा गान एवं जयघोष के साथ गिरजाघर का घंटा बजाया जाता है जो कि अर्धरात्रि में प्रभु के जन्म एवं विशेष समारोह का प्रतीक है।

पवित्र ख्रीस्तयाग के उपरांत शोभायात्रा द्वारा जन्मे प्रभु ईसा की प्रतिमा को गिरजाघर से स्थानांतरित कर चरनी में स्थापित किया जाता है तथा चरनी का अभिषेक किया जाता है। तत्पश्चात श्रद्धालुगण चरनी के समक्ष नतमस्तक होकर प्रभु का दर्शन कर उनकी आराधना एवं स्तुति करते हैं l एस खुशनुमा माहौल में ख्रीस्तीय अपने गिले -शिकवे भूल कर एक- दूसरे के गले मिलते हैं तथा ख्रीस्त जयंती गीत गाते और नाचते हुए जन्मे प्रभु ईसा का स्वागत करते हैं । इस खुशी के अवसर पर प्रभु ईसा के नाम पर एक- दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं l

ख्रीस्त जयंती समारोह की श्रृंखला में धर्मविधि के साथ -साथ कैंट स्थित सेंट मेरिज महागिरजाघर के प्रांगण में त्रिदिवसीय ( 25, 26, 27 ) ख्रीस्त जयंती मेला का भी आयोजन किया गया है। यह गौर फर्माने की बात है कि गत 30 वर्षों में क्रिसमस मेला काशी की गंगा -जमुना तहजीब का एक अनोखा और अभिन्न अंग बन गया है l इसलिए, ना केवल ख्रीस्तीय समुदाय बल्कि संपूर्ण समाज इस क्रिसमस मेला का बेसब्री से इंतजार करता है l वास्तव में यह मेला कोई साधारण भीड़ मात्र नहीं बल्कि भावनाओं का सजीव समन्वय है, जिसके माध्यम से विभिन्न रूपो में लोग एक -दूसरे के साथ प्रेम उत्सव एवं ज्योति उत्सव की दिव्यता का सहभाग करते हैं l मेले का मुख्य उद्देश्य सार्थक होता है जब हम ख्रीस्त जयंती की खुशी को एक दूसरे (विभिन्न धर्म एवं समुदाय ) के साथ बाँटकर तथा समाज ,देश एवं विश्व में ख्रीस्त के संदेश द्वारा प्रेम ,बंधुत्व ,मैत्री एवं शांति का संवर्धन करते हैं l क्रिसमस मेला का उद्घाटन वाराणसी धर्मप्रांत के धर्माचार्य डॉ. यूजीन जोसेफ के कर कमलों द्वारा 25 दिसंबर को अपराह्न 1:00 बजे किया जाएगा यह त्रिदिवसीय क्रिसमस मेला प्रतिदिन अपराह्न 12:30 बजे से प्रारंभ होकर संध्या 7:00 बजे समाप्त हो जाएगा l

ख्रीस्त जयंती मेला में पारंपरिक चरनी ,पवित्र बाइबल प्रदर्शनी ,कठपुतली नृत्य ,प्रार्थना, ख्रीस्त जयंती गीत, बच्चों तथा अन्य लोगों के लिए खेलकूद ,खानपान की दुकानों के साथ -साथ कुछ अन्य दुकानें भी लगाई जाएंगी l

मेले में पारंपरिक चरनी महागिरजाघर में भौतिक निर्धनता परंतु आध्यात्मिक समृद्धि का प्रतीक है।

 

जहां स्वयं प्रभु ने जन्म लेकर हमें विनम्र एवं त्यागी बनने की प्रेरणा देते हैं l

मरियालय के सामने एवम महागिरजाघर में क्रमशः प्रार्थना एवं ख्रीस्त जयंती गीत (Carol) का आयोजन किया जा रहा है, जहां श्रद्धालु जन्मे प्रभु ईसा की आशीष प्राप्त करने हेतु जा सकते हैं तथा ख्रीस्त जयंती गान द्वारा प्रभु का गुणगान भी कर सकते हैं l

पवित्र बाइबल प्रदर्शनी में संसार की सृष्टि से लेकर प्रभु ईसा के संपूर्ण जीवन को सचल मूर्तियों एवं ध्वनि तरंगों द्वारा दर्शाया गया है ताकि जनसामान्य कुछ ही क्षणों में अधिक से अधिक ज्ञान एवं सद्गुणों का आत्मसात कर सके। कठपुतली द्वारा भी प्रभु ईसा के संदेशों को प्रदर्शित किया जाएगा जिससे मनोरंजन के साथ -साथ लोगों में सद्गुणों का विचार हो l

गत वर्षो की भांति इस वर्ष भी भी क्रिसमस मेला के उद्घाटन के उपरांत अपराह्न 3:00 बजे से 5:00 बजे तक धर्माचार्य निवास पर नगर के गणमान्य नागरिकों के साथ ख्रीस्त जयंती की खुशी साझा करने हेतु ख्रीस्त जयंती मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है l

रीपोर्टर पूजा कपूर से वाराणसी धर्मप्रांत के धर्माचार्य डॉ. यूजीन जोसेफ का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू देखने के लिये इस वीडिओ को देखिये।

ख्रीस्त जयंती समारोह की श्रंखला का समापन 2 जनवरी को सेंट जॉन्स स्कूल, डीरेका में किया जाएगा l दिनांक 2 जनवरी को विकलांग दिवस मनाकर हम अपनी खुशी दृष्टिबाधित , मुकबधीर तथा शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों के साथ बाँटेंगे l उस दिन समारोह का शुभारंभ सुबह सांस्कृतिक कार्यक्रम द्वारा तथा समापन खेलकूद प्रतियोगिता तथा पुरस्कार वितरण द्वारा होगा l उक्त अवसर पर विकलांग विद्यार्थियों के साथ - साथ भारी संख्या में अन्य गणमान्यगण उनके उत्साहवर्धन हेतु उपस्थित होंगे|


इस खबर को शेयर करें

Leave a Comment