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वाराणसी के सारनाथ में तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का हुआ भव्य स्वागत



 29/Dec/17

तिब्बती धर्म गुरु परम पावन दलाई लामा वाराणसी के सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में 29 दिसंबर शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच पहुंचे। वे 30 दिसंबर शनिवार को संस्थान में होने वाले स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में शामिल होंगे। सारनाथ पहुंचने पर उनका तिब्बती परम्परानुसार भव्य स्वागत किया गया। 

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु परम पावन दलाई लामा बाबतपुर एयरपोर्ट से  सारनाथ तिब्बती संस्थान लगभग 2 बजे पहुंचे।  तिब्बती संस्थान पहुंचने पर बौद्ध भिक्षुओं और उपासकों ने संस्थान के गेट से लेकर दलाई लामा के प्रवास स्थल अंतर्राष्ट्रीय गेस्ट हाउस तक खाता व अगरबत्ती लेकर खड़े थे।दलाई लामा पहुंचने पर  तिब्बती परिधान पहने हुए संस्थान के छात्र तिब्बती वाद्ययंत्र टाशी, शोल्पा बजाने के साथ नाचते हुए दलाई लाम का स्वागत किया। दलाई लामा के प्रवास स्थल अंतर्राष्ट्रीय गेस्ट हाउस पहुंचने पर संस्थान के कुलपति गेशे नवांग समतेन, वज्र विद्या संस्थान के संस्थापक ठंगु रिनपोछे तथा कुलसचिव आर.के. उपाध्याय आदि लोगों ने तिब्बती परम्परानुसार परम पावन का स्वागत किया। 

तिब्बती छात्र - छात्राओं ने इस दौरान शुभ संकेत व कार्य के लिए तिब्बती लकड़ी के बने पात्र में तसम्पा (फल का जूस, गेहूं व दलिया) के साथ खड़े थे। पूर्व कुलपति एल.एन. शास्त्री ने बताया कि संस्थान के स्वर्ण जयंती समरोह में निर्वासित तिब्बती सरकार के राष्ट्रपति लोपसंग सेंगे, धर्म व संस्कृति मंत्री कर्मा गेले, स्पीकर लोपजंग सोनम तेनजिंग, डिप्टी स्पीकर आचार्य एसके फुइनछुक आदि शामिल होंगे।

दलाई लामा के प्रवास लिए बनाए गए अंतर्राष्ट्रीय गेस्ट हाउस की आतंरिक सजावट तिब्बत के पोटाला महल के तर्ज पर किया गया है। चीन ने 1949 में दलाई लामा के आवास पोटाला महल पर हमला कर दिया था। इस दौरान तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा को हजारों तिब्बती युवक - युवतीयों ने अपने जान की बाजी लगाकर उन्हें सुरक्षित बचाया इनमें तमाम लोगों की जान भी गई थी। 
    


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