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बड़ा लालपुर स्थित मिनी स्टेडियम में होगा कारपेट एक्सपो का आयोजन



 06/Oct/18

विश्व के प्रमुख कारपेट उत्पादक व निर्यातक देशों में भारत का कद सबसे बड़ा है, भारतीय कारपेट बाजार विश्व की लगभग पचास प्रतिशत मांग को पूरा करता है। विगत कुछ वर्षों से इंडियन कारपेट एक्सपो स्वयं में दुनिया के विदेशी कालीन खरीदारों के लिये एक सशक्त प्लेटफार्म तैयार कर चुका है। भारत हस्तनिर्मित कालीनों के साथ-साथ अन्य फ्लोर कवरिंग के निर्यात में पूरे विश्व को प्रतिनिधित्व करता है।

विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी 4 दिवसीय कारपेट ट्रेड फेयर का आयोजन वाराणसी में होने जा रहा है। कालीन मेला संपूर्ण विश्व को कालीन आयात हेतु एक सशक्त प्लेटफार्म है। विगत वर्षों में कालीन मेला सांस्कृतिक संकुल में आयोजित होता रहा है। लेकिन इस वर्ष यह कारपेट एक्सपो बड़ा लालपुर स्थित मिनी स्टेडियम में होने जा रहा है। अब देखना यह है कि स्थान परिवर्तन से 2018 कारपेट ट्रेड फेयर पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही नोटबंदी और जीएसटी से जहां देश का हर उद्योग प्रभावित रहा है उसी क्रम में कारपेट उद्योग भी अछूता न रहा। आईये जानते हैं कारपेट उद्योग से जुड़े उद्यमियों की क्या प्रतिक्रियाएं हैं-

मशीन मेड कारपेट के बिजनेस को पकड़ा टर्की और बेल्जियम ने : संजय मौर्य (श्रीतांशु ओरियन्टल रग्स)

श्रीतांशु ओरियन्टल रग्न के अधिष्ठाता श्री संजय मौर्य ने कहा कि मैं कारपेट उद्योग से 1998 से जुड़ा हुआ हूँ और फेयर में पार्टिसिपेट भी करता हूँ। वाराणसी में लगने वाले कालीन मेले के स्थान परिवर्तन के सवाल पर कहा कि इससे व्यापार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जीएसटी के सवाल पर कहा कि जब से जीएसटी लागू हुआ है समस्याएं तो बढ़ गई हैं। अभी तक हमलोगों ने जो जीएसटी जमा किया है उसका रिफंड हमें नहीं मिला है। पिछली सरकारों ने कारपेट उद्योग को बढ़ावा दिया लेकिन मोदी सरकार ने इसे पूरी तरह से खत्म कर दिया है। पहले हमें 9.7 प्रतिशत की छूट मिलती है लेकिन अब यह छूट घटकर 3.7 प्रतिशत हो गई है इससे हमारा व्यापार पचास प्रतिशत घटा है। व्यापार घटने की वजह से मशीन मेड कारपेट के लिये टर्की और बेल्जियम ने इस बिजनेस को पकड़ा है। श्री मौर्य ने आगे कहा कि हैण्डलूम कारपेट हिन्दुस्तान में बनता है या तो पाकिस्तान में बनता है। पाकिस्तान का करेन्सी ज्यादा डी-वैल्यूवेट हो गया है। हिन्दुस्तान का 1 डॉलर 70 रूपया है और पाकिस्तान का 1 डॉलर 130 रूपया है। कुल मिलाकर जो चीज हिन्दुस्तान में 10 रूपये की मिलती है वह पाकिस्तान में 5 रूपये की मिलेगी। जहां बायर को फायदा होगा, बायर तो वहीं जायेंगे।

जीएसटी लागू होने के बाद 20 प्रतिशत बिजनेस डाउन : आबिद हुसैन अंसारी (शम्सी कलेक्शन)

शम्सी कलेक्शन के अधिष्ठाता आबिद हुसैन अंसारी ने कहा कि मैं विगत 20 वर्षों से कारपेट उद्योग में हूँ। इस वर्ष कारपेट फेयर बड़ा लालपुर में लगने से काफी नुकसान होगा चूंकि फेयर शहर से काफी दूरी पर लग रहा है इस वजह से आने-जाने में दिक्कत होगी जिसका सीधा प्रभाव कारपेट उद्योग पर पड़ेगा। जीएसटी के सवाल पर कहा कि जीएसटी लागू होने की वजह से कारपेट उद्योग खत्म होने के कगार पर है। जीएसटी लागू होने के बाद 20 प्रतिशत बिजनेस डाउन हो गया है। जीएसटी जमा करने के बाद जो रिफंड मिलता है वो भुगतान भी हमें नहीं मिला है। मोदी सरकार से हमें कोई उम्मीद नहीं है।

जीएसटी समस्याएं इतनी हैं कि शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता :  इश्तयाक अहमद (इंटरनेशनल डायरस्)

इंटरनेशनल डायरस् के अधिष्ठाता इश्तयाक अहमद ने कहा कि मैं विगत 30 वर्षों से कारपेट उद्योग में हूँ। हमारे पिता भी इसी उद्योग से जुड़े हुए थे। वाराणसी में लगने वाले कारपेट फेयर में मैं कभी पार्टिसिपेट नहीं करता हूँ। लेकिन हमारे द्वारा बनाये हुए कारपेट फेयर में हमारी पार्टीयां अपने स्टाल में लगाती हैं। फेयर में विजिट करने के लिये मैं जाता हूँ। केन्द्र सरकार द्वारा जीएसटी लागू करने के सवाल पर कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद समस्याएं इतनी बढ़ गई हैं कि जिसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। जीएसटी की सिस्टम इतना है कि उसको पूरा करने में ही हम परेशान हैं। बड़े व्यापारियों को तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन छोटे व्यापारी बहुत परेशान है। जीएसटी जमा करने के बाद मिलने वाला रिफंड भी समय पर नहीं मिलता। मोदी सरकार जब तक रहेगी तब तक सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। पिछली सरकार में थोड़ी राहत थी। हम छोटे व्यापारियों की तकलीफ को समझने वाला कोई नहीं है।

65 देशों से बायरस आने की संभावना : अब्दुल रब (आरएमसी कलेक्शन)

आरएमसी कलेक्शन के अधिष्ठाता अब्दुल रब ने कहा कि वाराणसी में लगने वाले कालीन मेले की पूरी तैयारी हो चुकी है। इस बार यह फेयर बड़ा लालपुर मिनी स्टेडियम में लग रहा है। नई जगह के साथ-साथ इस वर्ष नये कंट्री से बायर की आने की संभावना है। अभी तक लगभग 250 रजिस्टेशन हो चुका है लेकिन हमें उम्मीद है की यह 300 तक हो जायेगा। कुल 65 देशों से बायरस आने की संभावना है। जीएसटी के सवाल पर कहा कि जीएसटी लागू हो जाने के बाद कारपेट उद्योग काफी प्रभावित हो रहा है। व्यापार में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हमें उम्मीद है कि इस वर्ष इस गिरावट को कम किया जाये और जो हमारा पिछला टारगेट रहा है उसे अचीव कर उसे और अधिक बढ़ाने का प्रयास करें।


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