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हिन्दू जनजागृति समिति तथा हिन्दू विधिज्ञ परिषद के तत्वावधान में वाराणसी में एकदिवसीय अधिवक्ता अधिवेशन!



 22/Nov/18

कानून का नहीं, न्याय का राज्य अर्थात् हिन्दू राष्ट्र लाने हेतु अधिवक्ता हुए संकल्पित!

वाराणसी के आशापुर स्थित मधुवन लॉनमें हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से 21 नवंबर 2018 को उत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत हिन्दू अधिवेशनके अंतर्गत अधिवक्ता अधिवेशनसंपन्न हुआ। अधिवेशन में उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरों को दिए आक्रांताओं के नाम बदलना प्रारंभ किया है, मात्र इससे पूर्ण बदलाव नहीं होगा। हर एक व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता है, जैसे आज भारत में न्याय का नहीं, अपितु कानून का राज चल रहा है। भारत के अधिकांश कानून ब्रिटिश राजसत्ता के द्वारा बनाए गये है । वह विदेशी कानून भारतीय नागरिकों को अधिकारों से वंचित रखने का कार्य कर रहे हैं, इसलिए भारत में वास्तविक न्याय की स्थापना के लिए व्यवस्था में परिवर्तन की आवश्यकता है। यह परिवर्तन अधिवक्ता वैधानिक मार्ग से कर सकते हैं। इस कारण अधिवक्ताओं का संगठन और कृतिशीलता की आवश्यकता है। हिंदू कार्यकर्ताओं को विभिन्न सरकारे कानूनी धाराओं में फंसाकर रखती है। इन कार्यकर्ताओं को सहायता तथा वैधानिक मार्गदर्शन की आवश्यकता है। हिन्दू विधिज्ञ परिषद के माध्यम से चल रहे धर्मकार्य में अधिवक्ताओं को सम्मिलित होने का आवाहन हिंदु जनजागृती समिती के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने अधिवक्ता अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में किया। सभी उपस्थित अधिवक्ताओं ने इस हिन्दू राष्ट्र के कार्य में न्यायालयीन क्षेत्र में सहभाग लेने के लिए संकल्प लिया।

अधिवेशन का प्रारंभ शंखनाद से हुआ। तत्पश्चात वेदमंत्रों से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया। हिन्दू जनजागृति समिति के पूर्वोत्तर भारत के मार्गदर्शक निलेश सिंगबाळजी ने हिन्दू जनजागृति समिति के प्रेरणास्थान परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले जी का संदेश पढ़कर सुनाया। इस अधिवेशन में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता हरिशंकर जैनजी, इंडिया विथ विजडम के अध्यक्ष अधिवक्ता कमलेशचंद्र त्रिपाठीजी, उपाध्यक्ष अधिवक्ता अवनीश रायजी, आसाम से अधिवक्ता राजीव नाथ आदि उपस्थित रहे।

प्रथम सत्र में उपस्थित अधिवक्ताओं कों संबोधित करते हुए हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अधिवक्ता संगठक नीलेश सांगोलकर ने कहा कि आज भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार बन गया है। अधिवक्ता समाज की वर्तमान सोच यही रहती है कि जो व्यक्ति मेरे पास आया है, उससे अधिक से अधिक धन कैसे अर्जित करूं, इसे बदलना होगा। इसके लिए धर्मकार्य के यज्ञ में स्वयं को आहुति के रुप में अर्पित करना है। जब किसी निर्दोष हिन्दुत्वनिष्ठ का उत्पीड़न होता है, तो अधिवक्ता होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि उन्हे हम हर प्रकार से सहायता करें।

इंडिया विथ विजडमके राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कमलेशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि, यदि अधिवक्ता राष्ट्र एवं धर्म के लिए कार्य करे तो देश भी सुरक्षित रहेगा। सरकार की ओर से केवल यह आश्‍वासन दिया गया कि वाराणसी में विश्‍वनाथ कॉरीडोर का पुनर्निर्माण कराया जाएगा। बकरीद में ऊंटों की कुर्बानी के विरोध में वर्ष 2014 से हम अन्य अधिवक्ताओं के साथ कार्यरत हैं। इस कुर्बानी का उद्देश्य होता है समाज में भय, दहशत उत्पन्न करना। इस प्रकरण में भी प्रशासन द्वारा लीपापोती की गई, जिससे उन्हें इसके संदर्भ में कोई कार्यवाही ही न करनी पड़े। हम अधिवक्ताओं का कर्त्तव्य है कि, अपने स्तर से अपनी क्षमता के अनुसार हर गलत कृति का प्रतिरोध करते रहें! यह प्रयास ही एकमात्र माध्यम है, जो हमारी सभ्यता, संस्कृति को सुव्यवस्थित चला सकता है!

इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता तथा हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस के हरिशंकर जैनजी ने कहा कि वक्फ बोर्ड कानूनऐसा विषय है जिससे हिन्दू अधिवक्ता दूर रहते हैं। वर्ष 1923 में वक्फ बोर्ड बना। वर्ष 1954 में वक्फ कानून बना जिसे असीमित अधिकार दिए गए। जिनका दुरुपयोग कर हिन्दुओं की जमीनों पर कब्जा किया। वर्ष 1995 नया वक्फ कानून बना, जिससे जमीनों कब्जा करना वक्फ के लिए और भी आसान हो गया। इसके प्रावधानों के विरुद्ध हम अधिवक्ताओं को एकजुट होना होगा। मुस्लिम देशों से आने वाले धन और इस कानून के बलपर जो लैण्ड जिहादचल रहा है जिसे केवल अधिवक्ता ही रोक सकते हैं।

अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए नागरिक सेवा उत्थान समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता अवनीश रायजी ने कहा कि संविधान में लिखा गया है, भारत का संविधान पंथनिरपेक्ष है, यदि ऐसा होता तो समानता होती! लेकिन प्रत्यक्ष में ऐसा नहीं है ! कोई जुलूस निकाला जाता है तो प्रशासनिक अनुमति ली जाती है लेकिन मुहर्रम के जुलस (जिसमें हथियारों का पूर्ण प्रयोग किया जाता है) के लिए यह स्पष्ट लिखा गया है कि यह धार्मिक जुलूस है, इसके लिए कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं है ! क्या यही समानता है? क्या यही पंथनिरपेक्षता है? अब हमें भी संगठित होने का समय आ गया है।

इस अधिवेशन में उपस्थित सभी अधिवक्ताओं ने राष्ट्र और धर्म के लिए कानूनी मार्ग से हिन्दुत्वनिष्ठों की सहायता करने का संकल्प लिया। इस अधिवक्ता अधिवेशन में उत्तरप्रदेश, झारखंड, बंगाल, आसाम, नई दिल्ली, ओडिशा राज्यों से अधिवक्ता सम्मिलित हुए।


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