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पीएम मोदी द्वारा विश्वनाथ कॉरिडोर शिलान्यास के दौरान बाबा भोले को मुक्त करने का वक्तव्य देना शर्मनाक है : अजय राय



 09/Mar/19

काशी के भोले बाबा विश्वनाथ सबके मुक्ति देने वाला  व्यापक लोक आस्था के महादेव हैं। प्रधानमंत्री और काशी के सांसद नरेन्द्र मोदी द्वारा सभी के मुक्तिदाता उन्हीं भोले बाबा को मुक्त करने का वक्तव्य देना बाबा के प्रति गहरी धार्मिक जन आस्थाओं पर चोट तथा काशी की महिमा पर आघात है। काशी में बाबा के प्रति ऐसे सत्ता दंभ की अभिव्यक्ति से साफ है कि काशी से मोदी जी की सत्ता मुक्ति अपरिहार्य है। यह बातें कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने मीडिया से एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान कही।

कहा कि विवादों से काशी विश्वनाथ कारीडोर का 8 मार्च को शिलान्यास करते हुये प्रधानमंत्री का यह कहना कि "आज भोले बाबा की मुक्ति का पर्व है, क्योंकि वह काशी में ठीक से सांस तक नहीं ले पा रहे थे", बेहद शर्मनाक और बाबा के प्रति लोगों की परंपरागत आस्था को ठेस पहुंचाने वाला रहा। हम ऐसी सोच एवं बयान की कड़ी निन्दा करते हैं। तीन दर्जन से ज्यादा पौराणिक मंदिरों एवं सैकड़ों भवनों को ध्वस्त करने, शिव के गण विग्रहों के अनादर तथा अमर्यादित स्वरूप में शिवलिंगों के कूड़े तक में पाये जाने से काशी पहले से आहत रही है। अब प्रधानमंत्री द्वारा लंबी परंपरा के पौराणिक महत्व वाले मंदिरों एवं उनके विग्रहों की उपासना का शास्त्रीय मर्यादाओं के साथ निर्वाह करते रहे लोगों को ही देवताओं के अतिक्रमण का अपराधी करार देना काशी की धार्मिक परंपरा का अपमान है। इससे काशी की धार्मिक आस्था कि पूजित रही प्रशस्त विरासत लांछित हुई है। वे सभी भवन इस सनातन नगरी की परम्परा से उसी स्वरूप में रहे, जिन्हें प्रधानमंत्री ने परोक्ष रूप से अतिक्रमण के अपराध का अखाड़ा बताकर काशी को अनावश्यक लांछित करते हुये, काशी की प्रशस्त धरोहरों के अशास्त्रीय धवस्तीकरण का औचित्य सिद्ध करने की एक अमर्यादित कोशिश की है।

काशी विश्वनाथ क्षेत्र में व्यापक धवस्तीकरण और नवनिर्माण की समूची योजना पर काशी के प्रति धार्मिक विश्वास की परंपराओं से जुड़े लोगों की आपत्ति का आधार यही रहा है कि पूरी योजना काशी और उसकी धर्म से जुड़ी परंपराओं के जानकार लोगों के विमर्श तथा उस पर आधारित जन विश्वास संजोने की जिम्मेदारी की अपेक्षा करते हुये सत्ता के दंभ से भरी अधिनायक शैली में बनाई एवं क्रियान्वित की गई। यदि और किसी ने ऐसा किया होता तो भाजपा तूफान खड़ा कर देती। जिस अहिल्याबाई की दुहाई प्रधानमंत्री ने दी है, उन्होंने तो वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण के समय मंदिर की परिवर्तित पुरानी संरचना तक को अपनी सक्षम सामर्थ्य के बावजूद ध्वस्त किये बिना निर्माण की यशस्वी भूमिका निभाई और उससे पूर्व चुनार किले में काशी की विद्वत पंडित सभा बुलाकर शास्त्रीय विमर्श प्राप्त किया।


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