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आजादी के वर्षों बाद पहली बार बनारस में कार्य दिख रहा है : संदीप सिंह

संजय कुमार मिश्र

 12/Apr/19

आजादी के वर्षों बाद पहली बार बनारस में कार्य दिख रहा है : संदीप सिंह

वाराणसी लोकसभा चुनाव 2014 में कई बातें इस संसदीय क्षेत्र में अभूतपूर्व हुई । गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां से चुनाव लड़ने का फैसला किया तो बनारस के चुनावी इतिहास में पहली बार मत प्रतिशत को बढ़ते हुए देखा तो कुल 43 प्रत्याशियों में 41 की जमानत जप्त होते भी देखा । संभवत: पहली बार किसी संसद ने अपने संसदीय क्षेत्र में इतना समय दिया । क्या बनारस का विकास हुआ ? या सिर्फ जुमलेबाजी ही होती रही ? इन सवालों के जवाब के लिए जब क्लाउन टाइम्स ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संदीप सिंह से जाननी चाही तो अनौपचारिक बात-चीत में उन्होंने स्पष्ट रूप से माना कि, हां पहली बार बनारस में काम हुआ। कार्यों में जहां विलंब हुआ तो उसके पीछे प्रदेश सरकार का असहयोग था। प्रदेश में सन 2014-17 तक सपा का शासन था जो जानबूझ कर बनारस में स्विकृत कार्यों को विलंबित किया।
आज बनारस में 24 घंटे बिजली-पानी, गढ्ढा मुक्त चौड़ी सड़के, साफ-सुथरा गली-मोहल्ला, विद्युत तारों के जंजाल से छुटकारा मिला तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगने से जमीन-भवन सस्ते हुए है । विश्वनाथ कॉरिडोर बन रहा है जो धार्मिक-पौरांणिकता को सहेजते हुए विस्तार दे रहा है । बुनकरों, शिल्पकारों के लिए जमीन पर पहली बार बनारस में किसी संसद ने काम करके दिखाया है । अस्सी घाट का निर्माण और सफाई के लिए झाड़ू उठाते पूरी दुनियां नें प्रधानमंत्री को देखा ।वाराणसी का पर्यटन उद्योग पिछले पांच सालों में अपने चरम पर रहा। संदीप कहते है कि हमारे शहर के लिए यह फक्र की बात है कि बनारस से हमारे देश के प्रधानमंत्री चुनाव लड़ रहे है ।
प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं पर सरकार के द्वारा नकेल कसे जाने के सवाल पर संदीप कहते है कि अगर विधान की बात करें तो सरकार कोई अनुचित कार्य नही कर रही पर एक बात जरूर कहूंगा कि सरकार सरकारी स्कूलों की तरफ भी ध्यान दे तो बेहतर होगा ।

वास्तव में यह जान-सुन कर दुख होता है कि भारत में शिक्षा पर बजट में सबसे कम प्रवधान सरकार करती है ।

 


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