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त्याग से ही ‘हिन्दू राष्ट्र-स्थापना’ का भव्य-दिव्य कार्य संपन्न हो सकता है



 08/Jun/19

रामनाथी (गोवा) - ‘‘हिन्दू राष्ट्र-स्थापना की दृष्टि से आवश्यक कौशल, क्षमता का विकास और साथ ही साधकत्व का विकास होने के लिए प्रयत्न करना आवश्यक है । त्याग से ही बडे-बडे भव्यदिव्य कार्य संपन्न होते हैं । सनातन धर्म का अंतिम पुरुषार्थ, अर्थात मोक्षप्राप्ति के लिए त्याग ही करना पडता है । हम भगवद्भक्त बन जाए, तो भविष्य के भीषण संक्रमण काल में ईश्‍वर हमारी रक्षा करेगा’’, ऐसा मार्गदर्शन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने किया । वे अष्टम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के अंतर्गत आयोजित हिन्दू राष्ट्र संगठक प्रशिक्षण एवं अधिवेशनके समापन सत्र में 8 जून को बोल रहे थे । उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न इस अधिवेशन में देश के विविध राज्यों से 250 से अधिक धर्मप्रेमी सहभागी हुए थे ।
सनातन संस्था की धर्मप्रसारक सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने इस समापन सत्र में कहा, ‘यथा शुभम् तथा कुरुम् ।’,अर्थात जो शुभ है, वह करना चाहिए’, यह धर्मवचन है । हिन्दू राष्ट्र-स्थापना का कार्य एवं साधना ये दोनों बातें शुभ हैं । इसलिए उन्हें अधिकाधिक करने का प्रयास करें !’
अधिवेशन में सहभागी धर्मप्रेमियों का मार्गदर्शन करते हुए सनातन संस्था के धर्मप्रसारक सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी ने कहा, ‘धर्मकार्य भावनावश न कर, सद्सद्विवेकबुद्धि से तथा साधना का अधिष्ठान रखकर करें ।
5 से 8 जून की अवधिमें हुए इस अधिवेशन में समय का नियोजन कैसे करें ?’, ‘निर्णयक्षमता का विकास कैसे करें ?’, ‘धर्मकार्य समर्पित भाव से कैसे करें ?’, ‘हिन्दू राष्ट्र के संदर्भ में जागृति करने हेतु किस प्रकार के उपक्रम आयोजित करने चाहिए ?’,इसी के साथ धर्मकार्य करते समय साधना का अधिष्ठान रखने का महत्त्वआदि विषयों पर मार्गदर्शन किया गया ।
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के विषय में जागृति पर सूत्रों का प्रभावीरूप से प्रस्तुतीकरण करने के अभ्यास के लिए प्रायोगिक भाग भी लिया गया । आधुनिकतावादियों द्वारा हिन्दू धर्म पर टीका कर हिन्दुओं का बुद्धिभेद करने का प्रयत्न होता है; इसके साथ ही हिन्दू राष्ट्र के विषय में भी आक्षेप लिया जाता है । इस पृष्ठभूमि पर हिन्दू राष्ट्र की मूलभूत संकल्पना, साथ ही उस पर लिया जानेवाला आक्षेप और उसका खंडन के विषय में दिशादर्शन किया गया । धर्मप्रेमियों ने धर्मकार्य करते समय आनेवाली समस्याओं को खुलकर बताया । तब उस पर क्या उपाययोजना करनी हैं, इसके बारे में भी बताया गया । इस माध्यम से अलग-अलग प्रांतों में धर्मरक्षा का कार्य किसप्रकार किया जाता है, इससे संबंधित बातें धर्मप्रेमियों को सीखने मिलीं । उपस्थित धर्मप्रेमियों ने जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम् ।का घोष करते हुए लोककल्याणकारी हिन्दू राष्ट्र के लिए समर्पित होकर कार्य करने का प्रण किया ।


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