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विवादित भूमि रामलला को, सुन्नी पक्ष को कहीं और मिलेगी 5 एकड़ जमीन



 09/Nov/19

अयोध्या विवादित जमीन पर शनिवार का दिन महत्वपूर्ण साबित हुआ, यह ऐतिहासिक दिन था जिसमें वर्षों पुराने विवाद का निवारण सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों ने किया। जिस पुराने विवाद ने सामाजिक ताने बाने को तार-तार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण का फैसला सुनाया। 5 जजों चीफ जस्टिस गोगोई, जस्टिस एस.ए. बोबोडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस. अब्दुल नजीर की संविधान पीठ द्वारा 45 मिनट तक पढ़े गए 1045 पन्नों के फैसले ने देश के इतिहास के सबसे अहम और एक सदी से ज्यादा पुराने विवाद का अंत कर दिया। संविधान पीठ ने सुबह 10.30 बजे सर्वसम्मति से अपना फैसला दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को दी जाए, मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बने और इसकी योजना तैयार की जाए। चीफ जस्टिस ने मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दिए जाने का फैसला सुनाया, जो कि विवादित जमीन की करीब दोगुना है। चीफ जस्टिस ने कहा कि ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है और हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है। निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही पक्षकार माना। टॉप कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार दिया और आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मस्जिद को अहम स्थान पर ही बनाया जाए। रामलला विराजमान को दी गई विवादित जमीन का स्वामित्व केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा।

खचाखच भरे कोर्टरूम नंबर-1 में मुख्ये न्यांयाधीश रंजन गोगोई ने खुद करीब 45 मिनट में पूरे फैसले को पढ़ा। अदालत ने फैसले में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट की स्थापना करे और विवादित स्थल को मंदिर निर्माण के लिए सौंप दे जिसके प्रति हिंदुओं का मानना है कि भगवान राम का जन्म वहीं पर हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रमुख बातें

चीफ जस्टिस ने कहा- हम सर्वसम्मति से फैसला सुना रहे हैं। इस अदालत को धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए। अदालत को संतुलन बनाए रखना चाहिए।

मीर बकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई। धर्मशास्त्र में प्रवेश करना अदालत के लिए उचित नहीं होगा।

विवादित जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के तौर पर चिह्नित थी।

राम जन्मभूमि स्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है, जबकि भगवान राम न्यायिक व्यक्ति हो सकते हैं।

विवादित ढांचा इस्लामिक मूल का ढांचा नहीं था। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था।

ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) कर चुका है। पुरातात्विक प्रमाणों को महज एक ओपिनियन करार दे देना एएसआई का अपमान होगा। हालांकि, एएसआई ने यह तथ्य स्थापित नहीं किया कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई।

हिंदू इस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं, यहां तक कि मुस्लिम भी विवादित जगह के बारे में यही कहते हैं। प्राचीन यात्रियों द्वारा लिखी किताबें और प्राचीन ग्रंथ इस बात को दर्शाते हैं कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है। ऐतिहासिक उद्धहरणों से भी संकेत मिलते हैं कि हिंदुओं की आस्था में अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है।

ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है, हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है। हालांकि, मालिकाना हक को धर्म, आस्था के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता। ये किसी विवाद पर निर्णय करने के संकेत हो सकते हैं।

यह सबूत मिले हैं कि राम चबूतरा और सीता रसोई पर हिंदू अंग्रेजों के जमाने से पहले भी पूजा करते थे। रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्य बताते हैं कि विवादित जमीन का बाहरी हिस्सा हिंदुओं के अधीन था।

1946 के फैजाबाद कोर्ट के आदेश को चुनौती देती शिया वक्फ बोर्ड की विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया। शिया वक्फ बोर्ड का दावा विवादित ढांचे पर था। इसी को खारिज किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया। निर्मोही अखाड़े ने जन्मभूमि के प्रबंधन का अधिकार मांगा था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था।

2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा रामलला विराजमान को मिले। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

कोर्ट ने साथ में यह भी आदेश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ जमीन दी जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए। इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व देने को कहा है।

आइये जानते हैं कि अयोध्या विवादित जमीन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा आए पूरे फैसले को देश के प्रमुख मीडिया ने कैसे प्रसारित किया और क्या रहीं सुर्खियां...

दैनिक भास्कर

अयोध्या की विवादित जमीन पर ट्रस्ट के जरिए राम मंदिर बने, मुस्लिमों को मस्जिद के लिए जमीन मिले

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण का फैसला सुनाया। 5 जजों की संविधान पीठ ने सुबह 10.30 बजे सर्वसम्मति से अपना फैसला दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को दी जाए, मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बने और इसकी योजना तैयार की जाए।

नवभारत टाइम्स

विवादित भूमि रामलला को, सुन्नी पक्ष को कहीं और जमीन

अयोध्या के 2.77 एकड़ जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला सर्वसम्मति से आया है। पांच जजों की संविधान पीठ ने 5-0 से यह फैसला दिया। इसके तहत टॉप कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को तार्किक नहीं माना, जिसमें तीन पक्षों को जमीन बांटी गई थी।

दैनिक जागरण

सुप्रीम कोर्ट ने किया राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ, मस्जिद के लिए दूसरी जगह देने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को 70 साल से कानूनी लड़ाई में उलझे और पांच सौ साल से अधिक पुराने देश के सबसे चर्चित अयोध्या भूमि विवाद मामले में अपना फैसला सुना दिया। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ करते हुए विवादित भूमि न्यास को सौंपने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में ही किसी दूसरे स्थान पर पांच एकड़ भूमि देने का फैसला सुनाया।

हिन्दुस्तान

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मंदिर के लिए दी जाएगी विवादित जमीन, मस्जिद के लिए वैकल्पिक भूमि

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि तीन-चार महीने के भीतर केंद्र सरकार ट्रस्ट की स्थापना के लिए योजना तैयार करे। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को मंदिर के लिए सौंपने का फैसला दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या में 5 एकड़ जमीन का एक उपयुक्त वैकल्पिक भूखंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।

 

आज तक

मंदिर वहीं बनेगा, मस्जिद भी बनेगी

देश के सबसे पुराने केस में से एक अयोध्या विवाद पर फैसला आ गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया है। रामलला का हक माना गया है, साथ ही मुस्लिम पक्ष को अलग जगह जमीन देने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है।

 

एबीपी न्यूज

रामलला को मिली विवादित जमीन, कोर्ट ने कहा- सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए पांच एकड़ जमीन

अयोध्या विवाद पर देश की सबसे बड़ी अदालत का फैसला आ गया है, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला की है, कोर्ट ने इस मामले में निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि तीन पक्ष में जमीन बांटने का हाई कोर्ट फैसला तार्किक नहीं था। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन दी जाए।

न्यूज 24

अयोध्या में बनेगा राम मंदिर, मस्जिद के लिए दी 5 एकड़ जमीन

सुप्रीम कोर्ट ने सालों से चले आ रहे अयोध्या विवाद का ऐतिहासिक पटाक्षेप कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विवादित स्थल मुख्य पक्षकार रामलला विराजमान को दिया जाए। इस पर मंदिर बनाने के लिए केंद्र एक ट्रस्ट का निर्माण करें।

एनडीटीवी इंडिया

रामलला विराजमान को विवादित जमीन का मालिकाना हक, मस्जिद ढहाना और मूर्तियां रखना गैर-कानूनी था

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या केस पर फैसला सुनाते हुए कहा है कि विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को दी जाएगी और मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए दूसरी जगह मिलेगी। कोर्ट ने शुरू में ही शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही कहा है कि मुसलमानों को मस्जिद के लिए दूसरी जगह दी जाएगी। यह फैसला सभी जजों की सहमति से हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि पुरात्व विभाग ने मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं। सैकड़ों पन्नों का जजमेंट पढ़ते हुए पीठ ने कहा कि हिंदू अयोध्या को राम जन्मस्थल मानते हैं और रंजन गोगोई ने कहा कि कोर्ट के लिए थिओलॉजी में जाना उचित नहीं है। लेकिन पुरातत्व विभाग यह भी नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी।

इंडिया टीवी

विवादित भूमि रामलला विराजमान को, सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और मिलेगी जमीन

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने विवादित जमीन हिंदुओं को सौंपी है और कहा है कि केंद्र सरकार एक ट्रस्ट बनाए जो मंदिर का निर्माण कराएगा। वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और 5 एकड़ जमीन देने की बात कही है।


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